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Mumbai, Maharastra, India
I have lost myself so until I find him within me there is nothing about me that can be written.

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Saturday, October 10

अन्जाम



साले हम ही छूट गए पीछे,

बाकि सब आँखे मीचे, ऐश में;

मेरे नज़रो के नीचे ,

नर्म गोश्त के मज़े लूटते,

नदीम बनके हमसे आदिल पूछते

( नदीम: दोस्त, आदिल : सही-ग़लत )



हम भी जान के नामालूम बने है बैठे

रुतबे के गरम जोश में,

चढी हुई डगमगाती होश में,

आधी आधूरी किसी फिरदौस में,

अपने उन्ही वीरानियों के आगोश में,

साले हम ही छूट गए पीछे |

( फिरदौस: जन्नत )



फासला अब शायद बढ़ता जाएगा,

लोग दूर, और मेरा अहम करीब आएगा,

गिरते चढाते पैमोनो पर रिश्ते तौले जाएंगे

कराह कर हर शक्स को वो अपना दुखरा सुनाएंगे |



अज़ नसिहतों की एक दौड़ चलेगी

हर्फ़-हर्फ हमारे दिल को चुभेगी,

येही हमारे इश्क का होगा अन्जाम,

पीछे छूटते रिश्तों में फिर जुडेगा हमारा भी नाम |

( अज़: फिर ,हर्फ़-हर्फ़: शब्द के हर अक्षर )


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