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Mumbai, Maharastra, India
I have lost myself so until I find him within me there is nothing about me that can be written.

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Sunday, August 30

बारिश

आज फिर बारिश में कोई रो रहा होगा,
और कही इसी बारिश में कोई ठिठो रहा होगा|
कही दूर, इसी बारिश में किसी को इश्क भी हो रहा होगा|

बारिश तो एक है,
लोग निकालते मतलब अनेक है|
मै सोचता हु,
मेरी बर्बादी पे शायद जन्नत भी रो रहा होगा|

2 comments:

  1. kaafi achchhi kavita hai mere bhai. par ye bata, teri barbadi kya hai?

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  2. it is a sarcastic n sadistic mood n view in life ....

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