My photo
Mumbai, Maharastra, India
I have lost myself so until I find him within me there is nothing about me that can be written.

My short Films

Loading...

Friday, March 26

अंत


दो लोग, कब तक साथ रह सकते है,
कयामत;
कयामत तो अब नज़दीक होते हुए भी दूर लग रही है |
ज़िन्दगी छोटी और इंसानियत मजबूर लग रही है |

 मगर आज, अंत, दिखा है मुझे 
क़यामत नहीं, एक किस्से का अंत, 
किस्सा कहें  या ज़िन्दगी के एक हिस्से का अंत,
बस आज अंत दिखा है मुझे|

  
हर उस सुबह की शाम का अंत,
हर उस आगाज़ के अंजाम का अंत,
हर उस मीरा के श्याम का अंत
बस आज अंत दिखा है मुझे|


8 comments:

  1. Jis cheez ki shuruaat hogi,uska ant bhi hoga..hame is tathya ko sweekar ke jeena hoga!
    Anek shubhkamnayen!

    ReplyDelete
  2. nice thought.. but lot of gender mistakes..
    QAYAAMAT- feminine
    INSANIYAT - feminine
    SHAAM - feminine "SUBAH KI SHAAM" not "subah ke shaam"

    ReplyDelete
  3. कुछ तो संबंधों की शुरुआत ही स्वार्थ समाप्त होने पर अंत की योजना बनाकर अंत करते हैं संबंध.

    ReplyDelete
  4. ये अंत नहीं शुरूआत है..देखने का नजरियां बदलो...दुनिया खुद ब खुद बदल जाएगी

    रोमल भावसा

    ReplyDelete
  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    ReplyDelete
  6. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

    ReplyDelete
  7. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete
  8. Maine aj jab apna blog khola mai dar gaya, ek saath itne log mere kavita pe reply karenge ye kabhe socha nahi tha.

    Dhanyavaad sab logo ka, mujhe lagta hai kisi group se mera blog link hua hai par mujhe samajh nahi aa rha kripya kar ke koi meri sahayata kare..

    Samvedna ke swar blog jin mahashay ka hia unhe vishes dhanyavaad.. English se hindi me transcript hone ke vajah se kuch galtiya aa jati hai.. vawishya me bhe aise galtiyo ko kipya mujhe btayein.. dhanyavaad

    ReplyDelete