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Mumbai, Maharastra, India
I have lost myself so until I find him within me there is nothing about me that can be written.

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Friday, March 26

Waiting for the Ray.....

सूरज के उस पहली किरण के इंतज़ार मे, मैंने ये रात गुजारी है,
यहाँ खुशिया ना है,
बस ग़म ही ग़म है,
दुखे ही सारी है,
सूरज के उस पहली किरण के इंतज़ार में,
मैंने ये रात गुजारी है|

ये अँधेरा भी क्या चीज़ है,
दीखता कुछ ना यहाँ,
पर दिखती हर देहलीज़ है|
किसी का ना चेहरा दीखता,
पर दिखती सब के मन की खींच है |
सूरज के उस पहली किरण के इंतज़ार में,
मैंने दिया अँधेरे को सींच है|

इस अँधेरे में लगता कोई ना अपना है,
पर सूरज के उस पहली किरण का इंतज़ार,
वह सपना, बस वोह मेरा अपना है|
 
घोर अँधेरे में खड़ा आज मै,
पर अब येही रौशनी ढूँढता हु,
हु वही, हु वही जहाँ पहले था
पर अब येही दिल्लगी ढूँढता हु|

देखता आ रहा हु सालों से,
कभी उनकी, कभी उसकी,
पर आज मेरी बारी है|
क्योंकि सूरज के उस पहली किरण के इंतज़ार में
मैंने ये रात गुज़री है,
 
फर्क बस इतना ह,
सब गर्मी, और मै सर्दी की रात गुजार रहा हु,
सूरज के उस पहली किरण के इंतज़ार में,
मै बेदर्दी की रात गुजार रहा हु|

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