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Mumbai, Maharastra, India
I have lost myself so until I find him within me there is nothing about me that can be written.

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Thursday, March 31

कश्ती कश्ती बदल पहुचे हैं आज वोह किनारे
द्वारपाल पुछा भवसागर का स्वाद तो बता प्यारे 
(द्वारपाल :दरवान,  भवसागर: ocean of life  )

पर जो पानी में कभी उतरा न हो वोह क्या बताता
डूबने का ग़म और तैरने की खुशी कैसे समझाता 

खुसरो कह गए थे इश्क दरिया है, डूब के जाना है
पर आज के दौड़ में किसने उसे माना है
(खुसरो: आमिर खुसरो, तेरहवी सदी के मशहूर कवी)


दुत्कार दिए गए वो फिर, स्वर्ग से युधिस्ठिर के कुत्ते की तरह
जिस पानी में जन्मे है उससे ही बचते रहे कुकुरमुत्ते की तरह
(कुकुरमुत्ते: mushroom)



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